जिस घड़ी तेरे दिल से उतर जाएँगे!जीते जी ही सनम हम तो मर जाएँगे! गर न चाहत का तेरी सहारा मिला!ग़म के मारे बता हम किधर जाएँगे! पास उल्फ़त का रक्खेंगे हर हाल में!तुम जो दोगे सदा हम ठहर जाएँगे! हम तो दीवाने हैं देखना एक दिन!मिस्ल-ए-ख़ूश्बू फ़ज़ा में बिखर जाएँगे! हो रफ़ीक़-ए-सफ़र तुम अगरContinue reading “जिस घड़ी तेरे दिल से उतर जाएँगे….”
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सारा आलम ही चमकदार नज़र आता है……
सारा आलम ही चमकदार नज़र आता हैतेरी चाहत का तलबगार नज़र आता है बे’हिजाबाना वो गुज़रे हैं इधर से शायदजिसको देखो वही मयख़्वार नज़र आता है मुंफइल होता नहीं है वो ख़ता पर अपनीउसके अख़्लाक़ में पिंदार नज़र आता है जब भी अंगड़ाइयां लेता है गुलों का मौसमतेरी बाँहों का मुझे हार नज़र आता हैContinue reading “सारा आलम ही चमकदार नज़र आता है……”