जिस घड़ी तेरे दिल से उतर जाएँगे!
जीते जी ही सनम हम तो मर जाएँगे!
गर न चाहत का तेरी सहारा मिला!
ग़म के मारे बता हम किधर जाएँगे!
पास उल्फ़त का रक्खेंगे हर हाल में!
तुम जो दोगे सदा हम ठहर जाएँगे!
हम तो दीवाने हैं देखना एक दिन!
मिस्ल-ए-ख़ूश्बू फ़ज़ा में बिखर जाएँगे!
हो रफ़ीक़-ए-सफ़र तुम अगर फिर तो हम!
राह-ए-पुरख़ार से भी गुज़र जाएँगे!
तुम तराशोगे गर नाज़-ओ-अंदाज़ से!
देखना एक दिन हम सँवर जाएँगे!
राह-ए-उल्फ़त में शबनम तुम्हें जो मिले!
वक़्त के साथ वो ज़ख़्म भर जाएँगे!
– ख़ान शबनम सुल्ताना